ProfileBizz
Dashrath Manjhi
The Mountain Man of Gehlaur
"Passion so fierce that even the mountain was forced to yield a path."
story
बिहार के गया जिले के पास स्थित गेहलौर गाँव में जन्मे दशरथ मांझी एक बेहद गरीब परिवार से थे। गाँव के ठीक सामने एक विशाल पहाड़ था जो पूरे गाँव को नजदीकी शहर, बाजार और अस्पताल से पूरी तरह अलग कर देता था।
एक दिन उनकी पत्नी फागुनी देवी पहाड़ के उस पार उनके लिए खाना ले जा रही थीं, तभी पहाड़ पर पैर फिसलने के कारण वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। सही समय पर इलाज न मिलने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई। इस दुख ने मांझी को तोड़ा नहीं, बल्कि एक ज़िद्दी संकल्प में बदल दिया।
उन्होंने अपनी कुछ बकरियाँ बेचकर छैनी और हथौड़ा खरीदा और अकेले ही उस विशाल पहाड़ को तोड़ना शुरू कर दिया। शुरुआत में गाँव वालों ने उन्हें 'पागल' समझकर मज़ाक उड़ाया। मौसम की मार भी उनके हौसले को नहीं तोड़ सकी।
आखिरकार 22 साल की अटूट मेहनत के बाद 1982 में उन्होंने 360 फुट लंबा रास्ता पहाड़ के बीच से काटकर बना दिया। इससे अत्रि और वजीरगंज के बीच की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 15 किलोमीटर रह गई।
17 अगस्त 2007 को एम्स, नई दिल्ली में उनका निधन हो गया। आज उनके बनाए रास्ते को आधिकारिक रूप से 'दशरथ मांझी पथ' कहा जाता है।
philosophy
जब मैंने पहाड़ तोड़ना शुरू किया तो लोगों ने मुझे पागल कहा। लेकिन मैंने अपनी पत्नी को वचन दिया था। जो काम सरकार दशकों में नहीं कर पाई, वो एक आदमी ने प्रेम और दर्द की ताकत से कर दिखाया।