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Arunachalam Muruganantham

Social Entrepreneur & Inventor

Arunachalam Muruganantham profile

"I am not Pad Man. I am a school dropout who stumbled upon a billion-dollar problem and refused to give up for 4 years."

story

यह कहानी तमिलनाडु के कोयंबटूर में रहने वाले एक बेहद साधारण इंसान अरुणाचलम मुरुगनांथम् की है। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर बहुत छोटी उम्र में मजदूरी और छोटे-मोटे काम करने पड़े।

उनकी जिंदगी में असली मोड़ तब आया जब उनकी शादी हुई। जब उन्होंने अपनी पत्नी से दुकान से सेनेटरी पैड खरीदने को कहा, तो पत्नी का जवाब था कि अगर पैड खरीदने लगेंगे तो घर के राशन का बजट बिगड़ जाएगा।

जब गाँव की मेडिकल छात्राओं ने संकोच के कारण उनकी मदद करने से इनकार कर दिया, तो मुरुगनांथम् ने खुद पर ही प्रयोग करने का फैसला किया। समाज के तानों से तंग आकर उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गई। लेकिन उन्होंने अपना मिशन नहीं छोड़ा।

करीब दो साल के कठिन शोध के बाद उन्हें समझ आया कि असली खेल एक खास तरह के सेलुलोज़ फाइबर का है। मुरुगनांथम् ने लगभग चार साल की कड़ी मेहनत से एक ऐसी आसान और कम लागत वाली मशीन तैयार की।

जब मशीन बनकर तैयार हो गई, तो उन्होंने इसे ग्रामीण भारत की महिलाओं को सौंपने का फैसला किया। उनकी कहानी पर बॉलीवुड में 'Pad Man' फिल्म बनी और उनकी कहानी पर बनी डॉक्यूमेंट्री ने ऑस्कर पुरस्कार भी जीता।

philosophy

अगर मैंने पैसा ले लिया होता, तो एक इंसान की मदद होती — मेरी। मशीन बाँटकर 1.3 करोड़ महिलाओं को अपनी आज़ादी मिली।